JAIPUR BOMB BLAST
कर्नाटक में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार की खूब आलोचना की। बीते 29 मार्च को ' जयपुर बम धमाकों ' के चार आरोपियों को राजस्थान उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया था। इसी पूरी घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहलोत सरकार की मानसिकता पर सवाल खड़े किये। उन्होंने कहा कि सरकार ने पैरवी में सतर्कता नहीं रखी और इस कारण जयपुर बम धमाकों के चारो आरोपी उच्च न्यायालय से रिहा हो गए
ध्यातव्य है कि बम धमाकों के चारो आरोपियों को स्पेशल कोर्ट ने 20 दिसंबर 2019 को फांसी की सजा सुनाई थी , इसके खिलाफ आरोपियों ने उच्च न्यायालय में अपील की थी।
वैसे ये साल राजस्थान के लिए खास है क्योकि साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने है। इस पुरे प्रक्रण को लेकर बीजेपी अलग-अलग तरह से कांग्रेस को घेर रही है।
खैर ये तो रही हालिया घटनाक्रम की बात। हम बात करते है ' जयपुर बम धमाकों ' की पूरी कहानी क्या है ? और कैसे बम धमाकों के आरोपी इस मामले में उच्च न्यायालय से रिहा हो गए। साथ ही ये भी जानेंगे कि सरकार इस मामले में आगे क्या करने की सोच रही है /
बात है 13 मई 2008 की , जयपुर में प्रतिदिन की तरह सब कुछ सामान्य था , लकिन शाम 7:20 बजे जयपुर के प्रतिष्ठित " हवामहल " के सामने एक धमाका होता है। लोग और प्रशासन कुछ समझ पाते इससे पहले ही मात्र 5 मिनट के अंतराल पर शाम 7:25 बजे एक और धमाका होता है और इस तरह आठ अलग-अलग जगहों पर आठ धमाके होते है। इन धमाकों में 75 को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है और सैकड़ो लोग घायल होते है। ये जयपुर में हुआ एक बड़ा आतंकी हमला था। साथ ही प्रशासन की मुश्तैदी के चलते एक टाइम बम को 'डिस्पोजल स्कवॉड ' द्वारा डिफ्यूस कर दिया जाता है।
इन धमाकों को अंजाम देने के लिए 12 आतंकी दिल्ली से बस में सवार हो कर विस्फोटकों के साथ जयपुर पहुंचे थे। यहां पहुंचने के बाद वे किशनपोल बाजार जाते है जहाँ से ये लोग 3 साइकिल खरीदते है और इन सभी पर बेग में ' टाइम बम ' लगाकर जयपुर की अलग-अलग जगहों पर खड़ी कर वापस जयपुर जंक्शन से शताब्दी एक्सप्रेस में सवार होकर वापस दिल्ली पहुंच जाते है।
जयपुर में हुए इन धमाकों की जिम्मेदारी " इंडियन मुजाहिदीन " ने अगले दिन 14 मई को अपने नाम से जारी ईमेल द्वारा ली। बाद में जाँच में पता चला कि ये ईमेल UP के साहिबाबाद की एक कंप्यूटर जॉब वर्क की दुकान से जारी हुए थे। इस मामले में कुल 13 लोगो को पुलिस द्वारा आरोपी बनाया गया था। इनमे से 3 आरोपी ( शाबाद उर्फ़ मालिक , मोहम्मद खालिद और साजिद ) अभी भी फरार है और हमले की जाँच कर रही ATS ( Anti Terrorism Squad ) हमलो के 15 साल बीत जाने के बाद भी पता नहीं लगा पाई है। वही 3 आरोपी तिहाड़ जेल में बंद है और 2 आरोपी ( मोहम्मद आतिक और छोटा साजिद ) 19 सितम्बर 2008 को हुए बाटला हाउस एनकाउंटर में मरे गए। बाकी 5 आरोपियों को स्पेशल कोर्टो ने 2019 में फांसी की सजा सुनाई थी। और एक आरोपी ( शहबाज हुसैन ) को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया था।
ये पूरा मामला इन चार आरोपियों ( मोहम्मद सैफ , सैफुर , मोहम्मद सरवर व सलमान ) के बरी होने का है। इस पुरे मामले को जस्टिस पंकज अंडारि और समीर जैन की बैच ने देखा। बैच ने कहा कि यह घटना जन अभाव से जुडी है लेकिन कोर्ट कानून और सबूतों के आधार पर फैसला देती है। उन्होंने कहा कि ATS और सरकारी वकील न तो आरोपियों की दिल्ली से जयपुर की यात्रा को साबित कर पाए और ना ही बम इंप्लास्ट करने की बात को।
कोर्ट के फैसले को राजस्थान सरकार ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है। अब देखना ये है कि आगे यदि ये मामला उच्चतम न्यायालय जाता है तो इस पर सुप्रीम कोर्ट का क्या निर्णय होगा ?
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